समाप्त होती जा रही है कुँए की उपयोगिता
मनियर (बलिया) । आजकल कुएं का उपयोग न के ही बराबर हो गया है। आधुनिक संसाधन होने के कारण हैंडपंप का अस्तित्व भी धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। बिजली के मोटर से पानी की निकासी हो रही है इसलिए कुएँ का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। पहले सिंचाई एवं प्यास बुझाने के लिए कुएँ का प्रयोग होता था यही नहीं विवाह एवं जन्म संस्कार के समय धार्मिक अनुष्ठान भी कुएँ के पास होता था लेकिन जगह की कमी होने के कारण या प्रचुर मात्रा में पानी के संसाधन हो जाने के कारण अधिकांश कुँए पाट दिए गए हैं या जो हैं भी उसकी न तो साफ सफाई की जा रही है न ही उसके पानी का कोई उपयोग कर रहा है बल्कि उसमें कूड़ा करकट डाला जा रहा है।
बात कर रहे हैं मनियर ब्लॉक के सरवार ककरघट्टी ग्राम पंचायत के ग्राम गंगापुर की जहां एक पकवा इनार के नाम से प्रसिद्ध कुँआ है ।आज भी इसकी सुंदरता देख लोग दांतो तले उंगली दबाते हैं। उक्त कुआं के विषय में दीनानाथ राम से पूछे जाने पर वे बताए कि उक्त कुँए का निर्माण प्रसिद्ध व्यापारी लच्छू बिलर के द्वारा कराया गया था ।उस समय लोग कुआं एवं तालाब खुदवाना धार्मिक एवं पूण्य का कार्य समझते थे जबकि आजकल उसे पटवाने में लोग पाप पुण्य का भी ध्यान नहीं रखते हैं।
रिपोर्ट - वीरेंद्र सिंह
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