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मनियर रहा है भगवान परशुराम की तपोभूमि


 मनियर (बलिया) । उत्तर प्रदेश के बलिया जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर उत्तर दिशा में नगर पंचायत मनियर बसा है ।यह नगर धर्म के मामले में विख्यात रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में कई ऋषि-मुनियों ने तप किया था जिसमें विष्णु के छठे अवतार के रूप में विख्यात भगवान परशुराम भी रहे हैं।

   भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया के दिन हुआ था ।इनके जन्म स्थान के बारे में विद्वानों के अलग-अलग मत है। कोई मध्यप्रदेश के इंदौर के जानापाव, तो कोई छत्तीसगढ़ के सरगुजा के कलचा गांव, तो कोई उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के जलालाबाद बताता है । वहीं भृगु क्षेत्र के शोधकर्ता साहित्यकार शिवकुमार कौशिकेय के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म बलिया जनपद के खैराडीह में हुआ था। 

   भगवान परशुराम का मंदिर मनियर में है जिनकी स्थापना की सटीक जानकारी नहीं मिलती लेकिन मनियर के प्रकांड विद्वान सुमन जी उपाध्याय बताते हैं कि परशुराम मंदिर के किसी गेट पर श्रीनाथ राय द्वारा संवत 1560 में जीर्णोद्धार कराए जाने की बात लिखी गई है। मंदिर की देखरेख पूर्व मंत्री स्वर्गीय निर्भय नारायण सिंह उर्फ लाल बाबू के परिवार के लोग करते हैं। इसी  परिवार के स्वर्गीय निर्भीक नारायण सिंह उर्फ मानिक जी ने स्वर्ग सिधारने से कुछ वर्ष पूर्व बताया था कि श्रीनाथ राय हमारे ही पूर्वज थे।

   भगवान परशुराम की तपोभूमि मनियर बताई जाती है ।यहां भगवान परशुराम तप करते थे। उस समय यह क्षेत्र घना जंगल था ।जंगलों में मणिधर सर्प हुआ करते थे जिसके कारण इसका नाम मणिवर पड़ा। बाद में यहाँ मुनियों द्वारा तपस्या किए जाने के कारण मुनिवर पड़ा। उस मणिवर व मुनिवर का वीभत्स रूप आज मनियर है ।

   भगवान परशुराम जब यहां ध्यान मुद्रा में लीन होते थे तो बहेरा कुंवर नामक राक्षस ताल ठोंक कर और गर्जना कर उनका तप भंग किया करता था जिसके कारण एक दिन भगवान परशुराम ने उसे मऊ जनपद के ताल रतोह में युद्ध के दौरान मार डाला और उसके शव को घसीटते हुए मनियर लाकर घाघरा नदी में जल प्रवाह किया।उसके शव के भार के वजह से जिस रास्ते से घसीट कर लाए थे उस रास्ते में नाला बनता गया ।वह नाला आज भी विराजमान है।

    परशुराम जयंती के अवसर पर मनियर बस स्टैंड के पास एक मेला लगता है जिसे अक्षय तृतीया (एकतिजिया) के मेला कहते हैं जो करीब एक पखवाड़े तक रहता है ।परशुराम जयंती के दिन लोग शुभ कार्य का समहुत भी करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसदिन शुभ कार्य करने पर शुभ कार्य अक्षय हो जाता है उसका नाश नहीं होता।

    रिपोर्ट - वीरेंद्र सिंह पत्रकार -मनियर -बलिया



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