कल मनाई जाएगी गुरुर विदास जयंती
सिकंदरपुर,(बलिया) । गुरु रविदास 15वीं और 16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के एक रहस्यवादी कवि संत थे और उन्होंने रविदासिया धर्म की स्थापना की थी। गुरु रविदास जयंती उनके जन्म के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।कहा जाता है कि गुरु रविदास ने कई भजन लिखे थे और उनमें से कुछ का जिक्र सिख धर्म की पवित्र पुस्तक, गुरु ग्रंथ साहिब में मिलता है।संत रविदास ने अपनी कालजयी रचनाओं से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है।देशभर में माघ पूर्णिमा के अवसर पर संत रविदास जी का जन्म दिवस बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।इस दिन लोग कीर्तन जुलूस निकालते हैं।इस दौरान गीत- संगीत, गाने, दोहे सड़कों पर बने मंदिरों में गाए जाते हैं। संत रविदास जी के भक्त उनके जन्म दिवस के दिन घर या मंदिर में बनी उनकी छवि की पूजा करते हैं।हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु रविदास जी का जन्म माघ माह की पूर्णिमा तिथि को वर्ष 1398 में हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि जिस दिन रविदास जी का जन्म हुआ था उस दिन रविवार था। इसी के चलते इनका नाम रविदास पड़ा। गुरू रविदास जयंती को दुनियाभर के लाखों द्वारा बेहद ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
रिपोर्ट - शैलेन्द्र गुप्ता
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