बिंदी उद्योग में पार्ट टाइम दस हजार महिलाएं कार्य कर रही है
मनियर (बलिया) । तेरी माथे की बिंदियाँ चमकती रहे ,तेरे हाथों में मेंहंदी महकती रहे। मेरे माथे की बिंदियाँ गजब करें, छैला की नजर बिंदियाँ पर पड़े। आदि फिल्मी गाने सुहाग की निशानी बिंदी के महत्व को दर्शाती है। कहते हैं कि बिंदी का रंग जितना गहरा होता है पति के साथ प्यार भी उतना ही गहरा होता है।माथे पर बिंदी लगाने से पति की उम्र लंबी होती है तथा महिलाओं की खूबसूरती बढ़ जाती है । बिंदी के महत्व के बारे में कहा गया है कि बिंदी लगाने वाली महिलाओं की एकाग्रता बढ़ जाती है एवं शांति मिलती है ।वह तनाव से दूर रहती है ।
मनियर का बिंदी उद्योग काफी पुराना है। 1950 के दशक से यहां का बिंदी उद्योग संचालित है ।कुछ लोगों की तीसरी पीढ़ी इस धंधे में हैं ।पहले बिंदी शीशे को गलाकर बनाई जाती थी। उस पर सोने एवं चांदी का पानी चढ़ाया जाता था। उस पर फूल पत्ती का चित्र बनाया जाता था। सीताराम, पति आदि लिखा जाता था। धीरे-धीरे 1980 -90 के दशक में वाल्वेट आने लगा। उसे काटकर कागज के पत्ते पर चिपकाया जाता था ।उसमें व्यापारियों को काफी लाभ होता था। इसके बाद वाल्वेट की जगह रेडीमेड कटे कटाई बिंदी आने लगी और इस धंधे में बड़े-बड़े व्यापारी उतर गए जिसके कारण यहां के व्यापारियों का धंधा धूमिल होने लगा।
कोरोना काल में तो यह धंधा बिल्कुल चौपट हो गया क्योंकि आवागमन के साधन बंद हो गए और रा मेटेरियल जहां था वहीं रहकर खराब हो गया। फिर जब यातायात के साधन शुरू हुए तो यह धंधा फली फुलित होने लगा ।
मनियर में बिंदी उद्योग से जुड़े व्यवसाई पूर्व चेयरमैन मोहम्मद मोबीन के सुपुत्र परवेज आलम उर्फ गोल्डेन ने बताया कि हम लोग बिंदी मैटेरियल दिल्ली, मुंबई व कानपुर से मंगाते हैं एवं तैयार करके हम लोगों का बिंदी दिल्ली, मुंबई , छपरा ,चंपारण, गोरखपुर, सीवान ,सीतामढ़ी ,रक्सौल, पटना आदि शहरों में जाता है ।पहले की अपेक्षा इस धंधे में लाभ बहुत ही कम है। माल जब लेकर शहरों में हम जाते हैं तो व्यापारियों द्वारा मनमानी रेट पर खरीददारी की जाती है ।बहुत से लोग इस धंधे से पलायन कर चुके हैं तो बहुत से नए लोग भी जुड़े हैं। हम लोगों का बिंदी कागज के पत्ते पर चिपकाने के लिए मनियर ,बेरूवारबारी, नवानगर, बांसडीह सहित आदि ब्लाकों एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में भी भेजा जाता हैं। घर की कामकाजी महिलाएं घर की काम निपटाने के बाद बिंदी कागज के पत्ते पर चिपका कर 60 से 80 रुपए प्रतिदिन कमा लेती है। करीब दस हजार महिलाएं पार्ट टाइम इस रोजगार में लगी हैं ।
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के नाम पर किसी प्रकार के लाभ पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम लोगों को इसका लाभ नहीं मिला है ।इसकी प्रक्रिया थोड़ी जटिल हैं। हां एनजीओ के लोग हम लोगों के यहां से कुछ बिंदी मटेरियल लेकर जाते हैं तथा उसे अपना कारोबार दिखा कर लोन उठा रहे हैं। क्या कह रही हैं पार्ट टाइम काम करने वाली महिलाएं? पार्ट टाइम काम करने वाली महिला खुशबू पासवान, गुड़िया पासवान, प्रीति पासवान का कहना है कि घर का काम काज करने के बाद हम लोग बिंदी कागज के पत्ते पर चिपका कर प्रतिदिन 60 से 80 रूपये कमा लेती हूँ।
इस धंधे में शामिल हैं मेराज, इफ्तिखार, नियाज भाई ,जावेद भाई ,नसीरुल्लाह, आरिफ भाई, साहब लाला, दिलीप भाई ,पवन गुप्ता, परमात्मा शर्मा, सरफराज, चुन्नू ,इमरान, शमीम, नसीम आदि।
रिपोर्ट - वीरेंद्र सिंह
No comments