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पाठक जी के मूर्ति का अनावरण हुआ


 मनियर (बलिया) । जब मन में वैराग्य उत्पन्न हो जाता है तो सारे संसारिक सुख निरस लगने लगता है जैसे भगवान बुद्ध एवं भगवान महावीर राज घराने में पैदा होने के बावजूद भी सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया था और सत्य की खोज में निकल पड़े थे ।वही कार्य मनियर थाने पर तैनात एक दरोगा ने भी वैराग्य उत्पन्न होने पर पद से त्यागपत्र देकर भगवत साधना में लीन हो गए थे जिनका नाम कुबेर नाथ पाठक था। उनके मूर्ति का अनावरण 12 फरवरी दिन शनिवार को झूमक बाबा मठ उत्तर टोला में शनिवार के दिन हुआ। पुलिस विभाग से 1973 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्त योजना के तहत सेवानिवृत्त होने के बाद अपने कर्म भूमि को ही तपोभूमि पाठक जी ने बनाया और 35 वर्षों तक मनियर में झूमक बाबा के स्थान पर रहकर साधना में लीन रहे। उन्होंने रामचरितमानस पाठ की शुभारंभ मनियर में कराना शुरू किए जिनका देखा देखी शुभ अवसर पर क्षेत्र के लोगों ने 24 घंटे का रामचरितमानस पाठ कराने लगे। उन्होंने 11 फरवरी 2008 को नश्वर शरीर त्याग कर ब्रह्मलोक को गमन कर गए। 

इस मौके पर पहुंचे उनके भतीजा चंद्रपति पाठक ने बताया कि वह हमारे सगे चाचा थे तथा आजमगढ़ जनपद के ग्राम पोस्ट पटखौली के मूल निवासी थे ।वह 1942 में पुलिस में भर्ती हुए थे तथा दरोगा  पद तक प्रमोट कर पहुंचे थे ।नौकरी के दौरान ही इनके मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया और वह 1973 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्त लेकर साधना में लग गए।


रिपोर्ट - वीरेंद्र सिंह

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