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भोले बाबा अब रक्षा करना


 मनियर (बलिया)। एम डी की पढ़ाई करने यूक्रेन गया युवक के घर वापसी पर पिता पुत्र दोनों भावुक हुए। मनियर थाना क्षेत्र के रामपुर दक्षिण निवासी हाल मुकाम मनियर बस स्टैंड चंद्रभान गुप्ता के पुत्र रवि प्रकाश गुप्ता विगत 2018 में यूक्रेन के बी एन कारजिव खारकिव नेशनल यूनिवर्सिटी में डॉक्टरी की पढ़ाई करने गया था ।इसी बीच रूस एवं यूक्रेन के बीच जंग छिड़ गई। वहां की स्थिति किस तरह भयावह है इसकी चर्चा रवि प्रकाश गुप्ता ने मंगलवार को घर वापसी के बाद बताया ।

 बतौर रवि प्रकाश गुप्ता यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहकर करीब डेढ़ सौ की संख्या में इंडियन छात्रों के साथ पढ़ाई कर रहा था ।इसी बीच रूस एवं यूक्रेन के बीच तनाव चल ही रहा था कि रूस के तरफ से हमला होने से वह अपने मित्रों के साथ चार पांच रोज यानी 23 फरवरी से 28 फरवरी  तक सोया नहीं था । बंकरों में छिपे हुए थे। इसी बीच 1 मार्च शिवरात्रि के दिन खारकीव क्षेत्र युद्ध से प्रभावित होने लगा। 

रूसी सेना राकेट से बमबारी करने लगी तो छात्रों ने वहां से अपने वतन को लौटने में ही भलाई समझी ।रवि प्रकाश गुप्ता ने बताया कि हम लोग भारतीय झंडा लिए 9 किलोमीटर पैदल यात्रा करके खारकीव रेलवे स्टेशन वहां की भाषा बक्जाल पहुंचे ।ट्रेन के लिए हमको 12 घंटे इंतजार करना पड़ा ।उसके बाद ट्रेन मिली तो हम लोग 22 घंटे में लवीव  पहुंचे। हमें यह भी सूचना मिली की जिस ट्रेन में हो उस टाइम पर अटैक होने वाला है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसके पहले जाने वाली ट्रेनों पर यूक्रेनी लोग अटैक कर सवार हुए थे। हर जगह भगदड़  थी । ट्रेनों में काफी भीड़ थी। वहां से लवीव की दूरी करीब 1600 किलोमीटर है। फिर हम लोग 2 मार्च को छोटे छोटे वाहनों से चोप बॉर्डर पहुंचे जो यूक्रेन एवं हंगरी का बॉर्डर था ।


वहां चोप जुहानी शरणार्थी कैंप में पहुंचे। जहां से वैलेंटियर हम लोगों को हंगरी की राजधानी बुडापेस की ट्रेन में फ्री में टिकट देकर  बैठा दिए। बुडापेस में इंडिया एंबेसी के लोग मिले जो हमें दिल्ली एवं मुंबई की हवाई जहाज में बैठाए। मुझे दिल्ली आने वाली जहाज मिली और 3 मार्च को इंदिरा गांधी एयरपोर्ट दिल्ली में दोपहर करीब उतरे। दिल्ली में आने के बाद  अपने उन मित्रों से मिला जो मुझे यूक्रेन से इंडिया आने के लिए मोबाइल पर गाइडलाइन दे रहे थे। रवि प्रकाश ने बताया कि जान बची तो लाखों पाए। जब हम लोग हंगरी की सीमा में प्रवेश कर लिए थे तो हमारी जान में जान आई । हंगरी युद्ध  से प्रभावित नहीं था ।घर पहुंचने पर रवि प्रकाश अपने पिता चंद्रभान गुप्ता से मिलकर भावुक हो उठा। पिता ने भी बेटे को गले लगा लिया।


रिपोर्ट - वीरेंद्र सिंह

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