प्रशासनिक उपेक्षा से पीपा पुल के अरमान बने सफेद हाथी
सिकन्दरपुर (बलिया) : क्षेत्र के ख़रीद व दरौली घाटों के मध्य सरयू नदी पर इस वर्ष पीपा पुल का निर्माण सर मुड़ाते ही ओला पड़े की कहावत को चरितार्थ कर रहा है।संसाधनों की कमी के बीच काफी विलम्ब से टेण्डर के बाद चार दिन पूर्व पीपों को जोड़ने का शुरू हुआ काम लेकिन स्लीपरों की जर्जर स्थिति को देख कर ठेकेदार द्वारा पांचवें दिन ही काम बंद कर देना पड़ा। इस से इलाक़ाई लोगों को लगने लगा है कि इस वर्ष शायद पीपा पुल का निर्माण व संचालन सम्भव नहीं हो सकेगा क्योंकि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का व्यवहार पुल को ले कर पूरी तरह से उपेक्षणीय है। जिसका स्पष्ट प्रमाण विलम्ब से टेण्डर का होना ,संसाधनों की कमी के बीच निर्माण कार्य का देर से शुरू होना और मात्र चार दिन में ही उसे ठेकेदार द्वारा बन्द कर दिया जाना है।
वैसे यह तथ्य है कि 11 दिसम्बर से शुरू हुए निर्माण कार्य में मात्र चार दिन में ही ठेकेदार के मजदूरों द्वारा खरीद घाट की तरफ से नदी के पाट में 32 पीपे जोड़ दिए गए हैं जबकि इस पाट में कुल 35 पीपे ही लगने हैं। तेज निर्माण की जो स्थिति रही यदि संसाधन उपलब्ध रहते तो अब तक दोनों पाटों में सभी आवश्यक पीपे जोड़ दिए गए होते और पुल पर गमनागमन भी चन्द दिनों में शुरू हो गया होता। इसको लेकर इलाकाई खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि पीपा पुल के निर्माण के दौरान हर साल ऐसी ही अड़चन आती है जिसके कारण पुल समय से कभी भी चालू नहीं हो पाता। ऐसे में क्षेत्र की जनता को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पीपा पुल का समय से निर्माण न होने से इलाकाई लोगों में आक्रोश की ज्वाला धधकने लगी हो और इसका असर सड़क पर कभी भी प्रस्फुटित हो सकता है।
संसाधनों का घोर अभाव, चार दिन बाद ही ठेकेदार ने बंद कराया निर्माण कार्य
इस सम्बन्ध में पुल के ठेकेदार ने बताया कि टेण्डर के बाद विभाग के अधीकारियों द्वारा मुझे आश्वासन दिया गया था कि पीपों को बांधने हेतु नए सिलपट के साथ अन्य सभी आवश्यक सामान उपलब्ध करा दिए जाएंगे किन्तु मौक़े पर वही पुराने जर्जर लकड़ी के सिलपट उपलब्ध कराए गए हैं जिनको जोड़ कर पुल का निर्माण करना उचित नहीं है क्योंकि उस पर आवागमन बड़ी दुर्घटना को दावत देना होगा। यह भी बताया कि सामानों और पीपों को खींच कर मौक़े पर लाने की भी कोई व्यवस्था विभाग द्वारा सुलभ नहीं कराई गई है। न तो नाव उपलब्ध कराई गई है न ही विभाग से कोई मल्लाह । बावजूद इसके विभाग का दिसम्बर के महीने में ही पुल को तैयार कर देने का दबाव भी है। ऐसी स्थिति में अधीकारियों के दबाव में दिसम्बर में पुल कैसे तैयार हो पायेगा,यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है
रिपोर्ट - मुश्ताक अहमद/शैलेन्द्र गुप्ता
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